Babasaheb Dr. Ambedkar Jivan Aur Chintan by Khairmode (Set of 12 Books)
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Babasaheb Dr. Ambedkar Jivan Aur Chintan by Khairmode (Set of 12 Books) book
This book is author by Changdev Bhawanrav Khairmodye and published by Samyak Prakashan
आंबेडकर वांगमय के बाद Encyclopedia of Dr Ambedkar जिसे कहा जाता है, जो मराठी भाषा से हिंदी में अनुवाद हुआ है जो की तत्त्वलीन बौद्धाचार्य शांति स्वरूप बौद्ध जी के महत्वाकांक्षी योजनाओं में से एक था जिसे वह पूरा करने के बाद अलविदा हुए मगर 12वां खण्ड पुस्तक के रूप में लाॅकडाउन के कारण देख नहीं पाए।
बाबासाहब अंबेडकर जी की 12 खंडों में जिवनी लिखने वाले प्रसिद्ध जिवनीकार चांगदेव खैरमोडे का संक्षिप्त परिचय।
- नाम :- चांगदेव भवानराव खैरमोडे
- जन्म :- 15 जुलाई, 1904
- जन्मस्थल :- पाचवड ता.खटाव, जिला. सातारा (महाराष्ट्र)
- शिक्षा :- बी.ए.
- मृत्यु :- 18 नवंबर 1971
लेखन :-
- 1) डॉ. भीमराव रामजी आंबेडकर चरित्र (खंड 1-12)
- 2) डॉ. भीमराव रामजी आंबेडकर : अस्पृश्यांचा उद्धारक
- 3) डॉ. आंबेडकर आणि हिन्दू कोड बिल
- 4) अमृतनाक (काव्य)
- 5) शुद्र पुर्वी कोण होते; लेखक : डॉ. आंबेडकर (मराठी अनुवाद)
- 6) हिन्दू स्त्रीयांची उन्नती व अवनती; लेखक : डॉ. आंबेडकर (मराठी अनुवाद)
चांगदेव खैरमोडे बाबासाहेब डॉ. आंबेडकर जी के करीबी लोगों में से एक हैं। उन्होंने बाबासाहेब डॉ. आंबेडकर जी जिवनी का पहला खंड अप्रैल 1952 में प्रकाशित किया था यानी तब बाबासाहेब डॉ. आंबेडकर जी जिंदा थे। खैरमोडे इन्हें बाबासाहेब डॉ. आंबेडकर जी की जीवनी लिखने की अनुमति (परमिशन) खुद बाबासाहेब डॉ. आंबेडकर जी ने ही दी थी। 1924 से 1927 के दरमियान बाबासाहेब डॉ. आंबेडकर खुद अपने जीवन की महत्वपूर्ण जानकारी खैरमोडे को बताते थे। खैरमोडे ने बाबासाहब आंबेडकर जी की जिवनी 12 खंडों मे लिखी हैं। आज उस जीवनी को कुछ हद तक Encyclopedia of Dr. Ambedkar भी कह सकते हैं क्योंकि खैरमोडे इन्होंने बाबासाहेब डॉ. आंबेडकर जी की जीवनी एकदम निष्पक्ष और पत्रकार की तरह लिखी हैं। उन्होंने बाबासाहेब डॉ. आंबेडकर जी को न ज्यादा बढाचढाकर दिखाया न कम दिखाया। बाबासाहेब डॉ. आंबेडकर जी जैसे थे वैसे दिखाया।
बाबासाहब आंबेडकर जी को 'बाबासाहेब' के नाम से और रमाबाई को 'आईसाहेब' नाम से पुकारा जाए ऐसा उन्होंने (खैरमोडे) ही सितंबर 1927 में बहिष्कृत भारत के ऑफिस में कुछ लोगों के साथ चर्चाएँ करते वक्त कहाँ था।
कुछ छात्रों ने सन 1928 को बाबासाहब डॉ. आंबेडकर जी का जन्मदिन मनाने की प्लानिंग की, उनमें खैरमोडे भी शामिल थे। डॉ. अंबेडकर खुद की जन्म तारीख नहीं बताएँगे इसलिए खैरमोडे खुद 1928 के मार्च माह में सातारा गए और उन्होंने सातारा के हायस्कुल का 1900 से 1904 साल का रजिस्टर देखा और आगे 14 अप्रैल को बाबासाहेब डॉ. आंबेडकर जी का जन्मदिन मनाना तय हुआ। यह जन्मदिन मनाने की आयडीया मोरे और वडवलकर इन्होंने सभा के माध्यम से सभी को बताई और तारीख 14 अप्रैल 1933 को मुंबई में डॉ. आंबेडकर जी का जन्मदिन पहली बार मुंबई के डिलाईड रोड के नजदीकी बी. डी. डी. चाल नंबर 14 के युनियन संस्था ने मनाया।
खैरमोडे लिखित बाबासाहेब डॉ. आंबेडकर जी की जिवनी (खंड 1-12) का हिन्दी अनुवाद सम्यक प्रकाशन दिल्ली द्वारा किया गया हैं। जिसके सभी 12 खंड आ चुके है ।
चांगदेव भवानराव खैरमोडे यह बाबासाहेब डॉ. आंबेडकर जी इनके साथियों में से एक थे। खैरमोडे इन्होंने बाबासाहेब डॉ. आंबेडकर जी का चरित्र बारह खंडों में लिखा हैं। खैरमोडे लिखित किताबों और बाकी लेखकों द्वारा लिखित किताबों में बहोत फर्क हैं। खैरमोडे लिखित बाबासाहब डॉ. आंबेडकर जी चरित्र मराठी में हैं और वो 12 खंडों में विभाजित हैं। जिसे सम्यक प्रकाशन द्वारा हिन्दी मे अनुवाद किया गया है।
खैरमोडे द्वारा लिखित किताबों की विशेषताएँ:-
- उन्होंने पहला खंड 1952 में प्रकाशित किया जब बाबासाहेब डॉ. आंबेडकर जी जिंदा थे।
- यह जिवनी लिखने के लिए खुद बाबासाहेब डॉ. आंबेडकर जी ने खैरमोडे को परमिशन दी थी।
- बाबासाहेब डॉ. आंबेडकर जी ने खुद के जिवन की जानकारी खैरमोडे को दी थी। (1924 से 1927 के दरमियान)
- खैरमोडे इन्होंने सिर्फ़ बाबासाहेब डॉ. आंबेडकर जी की जिवनी ही नहीं लिखी बल्कि उस दरमियान जो भी घटनाएँ हुई उनका ब्योरा भी उन्होंने अपनी किताब में दिया।
- उन्होंने बाबासाहेब डॉ. आंबेडकर जी इनके कुछ भाषण, उनके खत, उनके लेख, उनके निवेदन जैसे हैं वैसे ही दिए।
- उस समय की भारत की राजनीतिक, सामाजिक, आर्थिक, धार्मिक परिस्थितियों की जानकारी उन्होंने अपने किताब में लिखी।
- इन किताबों से तिलक, आगरकर, चक्रधर स्वामी, गोखले, नेहरू, जिन्ना और ऐसे बहोत से लोगों के बारे में जानकारी मिलती हैं।
- भारत में मुस्लिमों की संख्या बढने की वजह क्या थी यह जानकारी भी इन किताबों में मिलती हैं।
- महारों का संक्षिप्त इतिहास भी इसमें से पता चलता हैं।
- तीनों गोलमेज सम्मेलनो की जानकारी मिलती हैं।
- खैरमोडे ने यह किताबें लिखते वक्त एक निष्पक्ष पत्रकार जैसी भुमिका निभाई हैं।
- उनके लिखाई की भाषा एक रिसर्च बुक की तरह हैं।
- उन्होंने बाबासाहेब डॉ. आंबेडकर को न ज्यादा बढाचढाकर दिखाया हैं न कमजोर। एकदम निष्पक्ष लिखा हैं।
- उन्होंने अपने किताब में आंबेडकर के घराणे के लष्करी पेशा की पुरी जानकारी दी हैं। पुरे डिटेल में
- खैरमोडे के किताब से महार बटालियन की जानकारी मिलती हैं।
- बाबासाहेब डॉ. आंबेडकर जी के जीवन की छोटी छोटी जानकारी इनके किताब में हैं।
- जगह जगह पर बाबासाहेब डॉ. आंबेडकर जी के खत दिए गए हैं और कुछ लोगों ने बाबासाहेब डॉ. आंबेडकर जी को जो खत भेजे थे वो भी दिए हैं।
- बाबासाहेब डॉ. आंबेडकर जी कैसे बोलते थे, कैसे चलते थे, उनके आवाज का चढ़ाव उतार इन सब की जानकारी इस किताब से मिलती हैं।
- खैरमोडे ने बाबासाहेब डॉ. आंबेडकर जी के बारे मे जो बाते बताई वो अन्य किसी लेखक ने नही बताई।
- बाबासाहेब डॉ. आंबेडकर जी को बाबासाहेब कब से और किसने कहाँ इसकी जानकारी साथ ही बाबासाहेब डॉ. आंबेडकर जी का जनमदिन कब से मनाना शुरू हुआ यह जानकारी भी खैरमोडे इनके किताबों में हैं।
- उस वक्त के टाईम्स ऑफ इंडिया और अन्य अंग्रेजी, हिन्दी और मराठी अखबारों में जो भी खबरे प्रकाशित होती थी वो चाहे बाबासाहेब डॉ. आंबेडकर जी के बारे मे हो या अछुत समाज के बारे में वो खबरे खैरमोडे इन्होंने अपनी किताबों में जैसी हैं वैसी दी हैं।
- महाड आंदोलन, मनुस्मृति दहन और ऐसे विभिन्न और महत्वपूर्ण आंदोलनों की जानकारी इन किताबों में मिलती हैं।
- बाबासाहेब डॉ. आंबेडकर जी के जिवनी के साथ साथ हमे उसवक्त की विभिन्न परिस्थितियों की जानकारी भी इन किताबों से मिलती हैं। और भी बहोत सी महत्वपूर्ण और डिटेल जानकारी इन किताबों में शामिल हैं।
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Author | Changdev Bhawanrav Khairmodye |
Publisher | Samyak Prakashan |
Language | Hindi |
Set of | 12 Books |
Book Cover | Paperback |
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